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ग़ज़ल प्रस्तुति रति-लेखिका परवीन शाकिर।

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परवीन  शाकिर  सिर्फ  शायरा  नहीं  हैं   , वो  तो  लफ़्ज़ों  की  जादूगरनी  हैं  जिनकी  लफ़्ज़ों  का  तिलिस्म  ..कई  सदियों  से लोगों  को  दीवाना  बनाता  रहा  है  और  कई  सदियों  तक  दीवाना   बनाता रहेगा  , दुआओं  की  गुजारिश  है , खूबसूरत  शायरा  की   खूबसूरत  ग़ज़ल  पेश  है    :-

Click here“>कमाल-ए-ज़ब्त को ख़ुद भी तो आज़माऊँगी
मैं अपने हाथ से उस की दुल्हन सजाऊँगी
सुपुर्द कर के उसे चाँदनी के हाथों में

मैं अपने घर के अंधेरों को लौट आऊँगी
बदन के कर्ब को वो भी समझ न पाएगा

मैं दिल में रोऊँगी आँखों में मुस्कुराऊँगी
वो क्या गया कि रिफ़ाक़त के सारे लुत्फ़ गए

मैं किस से रूठ सकूँगी किसे मनाऊँगी
अब उस का फ़न तो किसी और से हुआ मंसूब

मैं किस की नज़्म अकेले में गुनगुनाऊँगी
वो एक रिश्ता-ए-बेनाम भी नहीं लेकिन

मैं अब भी उस के इशारों पे सर झुकाऊँगी
बिछा दिया था गुलाबों के साथ अपना वजूद

वो सो के उट्ठे तो ख़्वाबों की राख उठाऊँगी
समाअतों में घने जंगलों की साँसें हैं

मैं अब कभी तिरी आवाज़ सुन न पाऊँगी
जवाज़ ढूँड रहा था नई मोहब्बत का

वो कह रहा था कि मैं उस को भूल जाऊँगी 

#परवीन शाकिर

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1 Comment

  1. bahut khoob
    parveen shakir shayad bureaucrat bhi thi n?

    Like

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